माइक्रोप्रोसेसर (सीपीयू)
माइक्रोप्रोसेसर को आप कंप्यूटर का दिल कह सकते हैं। यह सबसे अहम पुर्जा है। कंप्यूटर की कार्यक्षमता पूरी तरह से इस पर निर्भर होती है। प्रोसेसरों का सफर 1971 में प्रारंभ हुआ था आज यह 4004 चिप से लेकर इटैनियम प्रोसेसर तक की यात्रा पूरी कर चुका है। इस अध्याय में प्रोसेसरों के विकास क्रम, तकनीक और आम समस्याओं के समाधान की जानकारी को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है।
इस अध्याय में हम पढ़ेंगे :
- प्रोसेसरों का विकास कम ।
- प्रोसेसरों की गति ।
- प्रोसेसर और डेटा बस विथ ।
- इंटेल प्रोसेसर स्पेशीफिकेशन।
- एमएमएक्स तकनीक |
- प्रोसेसरों के सॉकेट और स्लॉट।
- समस्यायें और समाधान।
माइक्रोप्रोसेसर (Micro Processor)
कंप्यूटर में माइक्रोप्रोसेसर की भूमिका सबसे अहम होती है। कंप्यूटर का यह पुर्जा आम बोलचाल की भाषा में प्रोसेसर के नाम से भी जाना जाता है और कुछ लोग इसे सीपीयू भी कहते हैं। यदि हम इसकी •तुलना कंप्यूटर के दूसरे पुजों से करें तो शायद यह सबसे महंगा है इसे मदरबोर्ड में बने हुए एक सॉकेट में लगाया जाता है। सबसे पहले प्रोसेसर का विकास इंटेल कॉरपोरेशन के द्वारा सन् 1971 में हुआ था और इसका नाम था 4004। इंटेल का आज तक पीसी के संबंध में प्रोसेसर बाजार पर कब्जा है। वैसे AMD और साइरेक्स जैसी कंपनिया भी भारत जैसे देश में भी अपने पैर धीरे-धीरे जमाने लगी हैं। आपको यह जानकर बड़ा आश्चर्य होगा कि आईबीएम (IBM) नामक कंपनी ने पहला पीसो 1981 में बनाया था लेकिन इंटेल ने प्रोसेसर इससे दस साल पहले ही बना दिया था। 4004 प्रोसेसर बाजार में 15 नवंबर 1971 को उतारा गया था। इस प्रोसेसर की क्लॉक स्पीड 108 Khz थी। सामान्य बोलचाल की भाषा में हम कह सकते हैं कि यह प्रोसेसर 108 हजार निर्देशों को एक सेकेंड में क्रियान्वित करने की क्षमता से लैस था। यह क्षमता वास्तव में एक मेगाहर्ट्ज का केवल दसवां भाग ही है।
4004 में 23 सो ट्रॉजिस्टर लगे हुए थे। जो कि केवल दस माइक्रओन जगह में थे। इसमें एक समय में 4-बिट डेटा ट्रांसफर हो सकता था और इसकी अधिकतम एड्रेसेबल मेमोरी 640 बाइट थी। इसे वास्तव में कैलकुलेटर के लिए बनाया गया था, बाद में इसे कुछ और उपयोगी मशीनों में इस्तेमाल किया गया। अप्रैल 1972 में इंटेल ने 200 Khz गति का 8008 प्रोसेसर बाजार में उतारा। इसमें 35 सौ ट्रॉजिस्टरों को दस माइक्रॉन जगह में लगाकर बनाया गया था। इसमें और पिछले प्रोसेसर में मुख्य अंतर यह था कि यह 8-बिट डेटा बस का इस्तेमाल करता था और इसकी एड्रेस मेमोरी 16 किलोबाइट हो गई थी। इसे भी सामान्य कैलकुलेटरों में इस्तेमाल किया गया। अप्रैल 1974 में इंटेल ने 8080 के नाम से एक नया प्रोसेसर बाजार में उतारा। जिसकी क्लॉक गति 2Mhz थी। यह पिछले प्रोसेसर से दस गुना ज्यादा ताकतवर था। इसमें 6 हजार ट्रॉजिस्टर लगे हुए थे जो केवल छह माइक्रॉन जगह घेरते थे। इसकी एड्रेस मेमोरी 64 किलोबाइट थी लेकिन डेटा बस केवल 8-बिट ही थी। वास्तव में यह ही वह प्रोसेसर था जिसने पोसी क्रांति की शुरुआत की। इसे पहले पर्सनल कंप्यूटर अल्टेयर 8800 में लगाया गया। इस प्रोसेसर के लिए CP/M ऑपरेटिंग सिस्टम को लिखा गया। इसी कंप्यूटर के लिये माइक्रोसॉफ्ट नामक कंपनी ने बेसिक भाषा को बनाया।
यह प्रारंभिक टूल्स पीसी क्रांति की आधारशिला रखने में कामयाब हुई। बाद में लिखे गए हजारों प्रोग्राम इसी प्लेटफार्म पर आधारित थे। कुछ समय बाद इंटेल से ही निकले हुए कुछ इंजीनियरों ने 8080 प्रोसेसरों का एक हमशक्ल प्रोसेसर बनाया। इसका निर्माण 1975 के अंत में जिलॉग नामक कंपनी के बैनर में किया गया और इसने जुलाई 1976 में Z-80 के नाम से प्रोसेसर को बाजार में उतारा। यह 8080 का परिष्कृत संस्करण था। इसकी खासियत यह थी कि यह पिन कम्पेटेबल नहीं था और इसमें रैम रिफ्रेस सर्किट था जोकि मेमोरी इंटरफेस की तरह से काम करता था। यह उन प्रोग्रामों को भी रन कर सकता था जो 8080 पर चलते थे। इसकी कीमत कम थी और इसमें कुछ नए इंटर्नल रजिस्टर जोड़े गए थे। इसके अलावा इसमें 10 Mhz की क्लॉक गति थी और यह 8500 ट्रॉजिस्टरों से मिलकर बना था। इसकी मेमोरी प्रयोग करने की क्षमता 64 किलोबाइट थी। रेडियो शेक नामक कंपनी ने इस प्रोसेसर को अपने पहले पीसी TRS-80 के लिए चुना इसके अलावा कई और भी कंपनियों ने इसे अपनाया CP/M ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए यह एक स्टैंडर्ड प्रोसेसर था
इस प्रोसेसर को बाजार से हटाने के लिए ने मा 1970 में 8085 के नाम से नया प्रोसेसर बनाया। लेकिन इनका यह प्रयोग ज्यादा सफल नहीं रहा। इसी समय कुछ और कंपनियों ने MOS पर आधारित 6502 नामक प्रोसेसर को 1976 में विकसित किया। इनकी कीमत केवल उस समय 25 डॉलर थी जबकि 8080 तोन सो डॉलर थी। कोमत की वजह से एपल कंपनी के मालिक स्टीव को यह प्रोसेसर पसंद आया और उन्होंने एपल-1 और एपल-2 के लिए इस्तेमाल किया। इस प्रोसेसर के निर्माण में मोट्रोला कंपनी के कुछ इंजीनियरों के अहम भूमिका थी। भोट्रोला कंपनी ने बाद में 68000 सीरोज़ के कई और प्रोसेसर बनाए। जोकि एपल मैक्टोस कंप्यूटरों के लिए बहुत बड़ा आधार है। आज भी एपल का पौवर पीसी इसी सीरीज़ के प्रोसेसर इस्तेमाल करता है। जून 1978 में इंटेल ने 8086 नामक चिप बनाया जोकि 16-बिट की डिजाइन पर आधारित था। इसमें 16-बिट को डेटा बस का इस्तेमाल हुआ था। इसके अंतर्गत 29000 ट्रॉजिस्टर प्रयोग किए गए थे जो 5Mhz की गति से काम करने में सक्षम थे। इसको मेमोरी एड्रेस क्षमता एक मेगाबाइट थी और यह बाद में बनने वाले 286, 386, 486 और 586 का शुरुआती पहलू था। आज प्रोसेसरों की यह गति बढ़कर 2Ghz तक पहुंच गई है।
प्रोसेसर के मुख्य भाग
प्रोसेसरों में मुख्य रूप से तीन भाग होते हैं। पहले भाग को इंटर्नल रजिस्टर कहते हैं। दूसरे भाग को डेटा इनपुट और आउटपुट बस कहा जाता है। तीसरे भाग को मेमोरी एड्रेस बस कहते हैं। 16Mhz से कम गति वाले प्रोसेसरों में कैश मेमोरी नहीं होती है। 486 प्रोसेसर के साथ ही L1 अर्थात लेवल-1 के नाम से प्रोसेसर पर सीधे-सीधे कैश मेमोरी को जोड़ा गया। बाद में यह लेवल बढ़कर L2 तक पहुंच गया। पेंटियम प्रो और पेंटियम 2 प्रोसेसरो में इंटेल कंपनी ने L2 कैश मेमोरी को सीधे-सीधे प्रयोग किया। जिसकी वजह से इसकी गति में आश्चर्यजनक रूप से बढ़ोत्तरी हुई। प्रोसेसर की गति इस बात पर निर्भर होती है कि वह एक सेकेंड में कितने निर्देशों का पालन कर सकता है। प्रोसेसरों की गति का संबंध मदरबोर्ड की गति पर भी निर्भर है। मदरबोर्ड की गति और प्रोसेसर की गति को आप दी हुई तालिका में देखकर समझ सकते हैं ।
एमएमएक्स (MMX) तकनीक
इस तकनीक का नाम वास्तव में मल्टीमीडिया एक्सटेंशन है। कुछ लोग इसे मैट्रिक मैथ एक्सटेंशन के नाम से भी जानते हैं। इंटेल कंपनी नें आज तक इसकी कोई परिभाषा नहीं दी है। बल्कि अपना इसे ट्रेड • मार्क बना लिया है। इस तकनीक का विकास पांचवीं पीढ़ी के पेंटियम प्रोसेसरों में हुआ। इसकी वजह से हम अपने कंप्यूटर में कई ऐड ऑन उपकरण इस्तेमाल कर सकते हैं। इस तकनीक ने वीडियो कम्प्रेशन और डी-कम्प्रेशन की क्षमता को बढ़ाया है। इसके अंतर्गत इमेज मैनीपुलेशन, इन्क्रिप्शन और इनपुट / आउटपुट प्रोसेंसिंग जैसे काम अलग-अलग
प्रोसेसरों के सॉकेट और स्लॉट
सॉकेट 370
ऑन सॉकेट 370 का इस्तेमाल पेंटियम 3 और सेलर प्रोसेसरों के लिए होता है। इसे जनवरी 1999 में इंटेल ने पी 6 श्रेणी के प्रोसेसरों के लिए बनाया था। इसे पीजीए 370 भी कहते हैं। निम्न चित्र में आप इसके टॉप व्यू को देख सकते
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| सॉकेट 370 |
सॉकेट 462 जून 2000 में AMD कंपनी ने सॉकेट 462 के नाम से प्रोसेसर का आधार विकसित किया । यह माइकोप्रोसेसर एथलॉन और ड्यूरॉन प्रोसेसरों के लिए बनाया गया है। इसके अंतर्गत 462 पिन होती है। निम्न चित्र में आप इसके लेआउट को देखकर समझ सकते हैं -
प्रोसेसर का तापमान ठीक रखना
जब प्रोसेसर काम करते हैं तो इनके अंदर लगे हुए ट्रॉनिस्टर ग्रमी पैदा कर देते हैं। यदि यह गर्मी एक सीमा से ज्यादा बढ़ जाए तो प्रोसेसर खराब हो जाता है। वैज्ञानिकों ने प्रोसेसर को ठंडा रखने के लिए होटसिंक और कूलिंग फेन को बनाया है। होटसिक प्रोसेसर के ऊपर लगाई जाती है और इसको बनावट ऐसी होती है कि यह प्रोसेसर की गर्मी को शोख लेती है। जिसकी वजह से प्रोसेसर ठंडा होता रहता है। होटसिंक चार तरह से प्रोसेसर पर लगाई जाती है। पहले तरीके को क्लिप टू प्रोसेसर कहते हैं। दूसरे तरीके को बांड ऑन स्टाइल कहा जाता है जबकि तीसरे को LIF स्टाइल और चौथे को ZIF स्टाइल कहते हैं। निम्न चित्र में इन चारों को दर्शाया गया है -
होटसिक के अलावा कूलिंग फैन भी प्रोसेसर को ठंडा रखने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। इन्हें प्रोसेसर के ऊपर क्लिप किया जाता है और इनमें विद्युत आपूर्ति पॉवर सप्लाई द्वारा होती है। इनकी नाटको आप निम्नचित्र में देख सकते है.
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| हीट सिंक |
वास्तव में कूलिंग फैन होटल में हो जुड़कर प्रोसेसर को ठंडा रखते है। यदि प्रोसेसर के सीकेट व Home! 106 प्रोसेसन स्लॉट में लगाया जा रहा है तो इसकी हीटसिंक और कुलिंग फैन की बनावट बदल जाती है।
निम्न चित्र में आप इसे देख सकते हैं -
एक अच्छी हीटसिंक में एल्यूमिनियम के रेडीएटर बने होते हैं जोकि हवा के बहाव की वजह से गर्मी को बाहर निकालते हैं। हीटसिंक कई भागों से मिलकर बनती है। निम्न चित्र में आप इन सभी भागों को
को-प्रोसेसर
प्रोसेसरों के साथ को-प्रोसेसर का जिक्र न हो तो यह गलत होगा। इस को-प्रोसेसर को कुछ लोग मैथ को-प्रोसेसर भी कहते हैं। 8086 से लेकर 486X2 तक यह प्रोसेसर से अलग होते थे, बाद में इन्हें प्रोसेसरों में ही जोड़ दिया गया और इनका नाम FPU कर दिया गया । FPU का अर्थ होता है फ्लोटिंग प्वाइंट मैथड |
प्रोसेसरों की पीढ़ियाँ
तकनीक के निरंतर विकास की वजह से अब पेंटिमय प्रोसेसर या इसके समतुल्य प्रोसेसर इस्तेमाल हो रहे हैं। पुराने प्रोसेसर धीरे-धीरे समाप्ति की ओर हैं। इस समय हम छठी पीढ़ी के प्रोसेसर इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें L2 कैश मेमोरी की क्षमता मेगाबाइट में पहुंच गई है। AMD का K6 सीरीज़ का प्रोसेसर में आता है।
निम्न चित्र में आप AMD के ड्यूरॉन प्रोसेसर को देख सकते हैं -
पेंटियम-4 प्रोसेसर
वैज्ञानिक पेंटियम-4 प्रोसेसर को सातवीं पीढ़ी का प्रोसेसर कहते हैं। इसका कारण यह है कि इसकी गति 1.3 गेगाहर्ट्ज से लेकर 2 गेगाहर्ट्ज के ऊपर होती है। इसमें 42 मिलियन ट्रांजिस्टर इस्तेमाल किए ज हैं। यह उन सभी सॉफ्टवेयरों को रन कर सकता है जो इंटेल के पुराने 32-बिट प्रोसेसरों पर आधारित हैं। इस प्रोसेसर की फ्रंट साइड की बस 400 Mhz पर काम करती है। इसकी अर्थमेटिक और लॉजिक यूनिट प्रोसेसर की कोर फ्रिक्वेंसी से दुगुनी गति से कार्य करती है। इसमें बीस स्तरों वाली तकनीक का प्रयोग किया गया है। जिसे हाईपर पाइप लाइन तकनीक कहते हैं। इसकी बहुत ही गहराई तक निर्देशों को क्रियान्वित करने की क्षमता है। यह प्रोसेसर इन्हेंस्ड ब्रांच प्रिडेक्शन तकनीक से भी युक्त है।
इसके अलावा यह 128 बिट 1.2 कैश मेमोरी का पूरी गति के साथ इस्तेमाल 8 अलग-अलग आयामो में करता है। इसकी वजह से इसमें 4 जीबी रैम इस्तेमाल हो सकती है। इसे SSE2-144 नए निर्देशों के साथ बनाया गया है। इसमें इन्हेंस्ड फ्लोटिंग प्वाइंट यूनिट लगी है। यह मल्टीपल लो पॉवर स्टेट पर आधारित है। निम्न चित्र में आप पेंटियम-4 प्रोसेसर को देख सकते हैं -
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| पेंटियम ४ प्रोसेसर |
आठवीं पीढ़ी का प्रोसेसर
आठवीं पीढ़ी के प्रोसेसर को इंटेल कॉरपोरेशन ने मई 2001 में प्रस्तुत किया। यह इंटेल का सबसे लेटेस्ट प्रोसेसर है। इसे 886 या इटैनियम का नाम दिया गया। यह ऐसा पहला प्रोसेसर है जो IA-64 यानी कि इंटेल आर्चीटेक्टर 64-बिट परिवार का सदस्य है। इसे खासतौर से सर्वर और वर्कस्टेशनों के बाजार को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इस प्रोसेसर में इंटीग्रेटेड कैश मेमोरी में तीन स्तर हैं। जिसके तहत यह 13 कैश मेमोरी को दो मेगाबाइट या चार मेगाबाइट की मात्रा में 128-बिट की L3 कैश बस के साथ प्रयोग करता है। इसमें 97 किलोबाइट L2 कैश मेमोरी है और 32 किलोबाइट LI कैश मेमोरी है। इसकी फ्रंट साइड की बस 266 मेगाहर्ज की गति से 64 बिट क्षमता के 21 गेगाबाइट पर सेकेंड की बैंड विर्थ के साथ काम करती है। यह 16 टेराबाइट फिजिकल मेमोरी को एड्रेस कर सकती है। जिसके लिए इसमें 64-बिट एड्रेस बस का प्रयोग किया गया है। यह 32 बिट निर्देशों के समतुल्य है। इसमें EPIC तकनीक का प्रयोग किया गया है। जो प्रत्येक चक्र में 20 ऑपरेशन पूरे कर सकता है।
इसमें दो इंटीज़र और दो मेमोरी यूनिट हैं जो चार निदेशों को प्रति क्लॉक के हिसाब से क्रियान्वित कर सकती हैं। इसमें दो फ्लोटिंग प्वाइंट मल्टीप्लाई एक्यूमेलेट प्रयोग किए गए हैं। इसमें दो अतिरिक्त MMX यूनिटों को लगाया गया है। जो दो सिंगल प्रिसीजन एफपी ऑपरेशन पूरे कर सकता है। इसके प्रत्येक चक्र में 8 FP ऑपरेशन एक्जीक्यूट होते हैं। इसमें लगा डेडीकेटेड पॉवर कनेक्टर सिगनल की गुणवत्ता को बढ़ाता है।
निम्न चित्र में आप इटैनियम प्रोसेसर की रूपरेखा देख सकते हैं -
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| इटेनियम प्रोसेसर |
समस्याएं और समाधान
इसका एक कारण यह हो सकता है कि कंप्यूटर में विद्युत आपूर्ति नहीं है और पॉवर केवल खराब हो गई है। ऐसी स्थिति में आप पॉवर केबल को दोबारा लगाएं या बदल दें। कई अवस्थाओं में नई दिखाई देने वाली पॉवर केबल भी खराब होती हैं। यदि पॉवर केबल सही है तो आप पॉवर सप्लाई को चैक करें। आप विद्युत टेस्टर के द्वारा यह जांचे कि विद्युत आपूर्ति के स्रोत में ही करेंट है या नहीं। कई बार मदरबोर्ड खराब होने पर भी यही समस्या आती है। ऐसी अवस्था में आप मदरबोर्ड बदल दें।






















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